अन्तर्राष्ट्रीय तरलता (international liquidity) किसे कहते है ?

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अन्तर्राष्ट्रीय तरलता किसी देश के लिए कितनी जरूरी है तथा इसके महत्व बताएं ?

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    संक्षेप मे कहे तो अन्तर्राष्ट्रीय तरलता(international liquidity) का अर्थ भुगतान की तत्परता से लगाया जाता है | किन्तु विस्तृत मे अन्तर्राष्ट्रीय तरलता मे वे सभी साधन शामिल होते है जो विभिन्न देशो के मुद्राधिकारियो को भुगतान संतुलन सम्बन्धी घाटे को पूरा करने के लिए उपलब्ध होते है | दुसरे शब्दों मे अन्तर्राष्ट्रीय तरलता उन सभी वितीय साधनों एवं सुविधाओं का समावेश होता है जो व्यक्तिगत राष्ट्रों के मोद्रिक अधिकारियो को अन्तर्राष्ट्रीय भुगतान शेषो के घाटे के निपटारे के लिए उपलब्ध होती है |

    किसी विद्वान ने अन्तर्राष्ट्रीय तरलता की परिभाषा दी है की “अन्तर्राष्ट्रीय तरलता से अभिप्राय उन समस्त सम्पतियो एवं साधनों के  योग से है जो राष्ट्रों को उनके अन्तर्राष्ट्रीय वित्तीय दायित्वो के निपटारे के लिए उपलब्ध हो सकते है” | अतः इस प्रकार अन्तर्राष्ट्रीय तरलता का अर्थ उन सम्पत्तियों, वित्तीय साधनों एवं सुविधाओं के योग से है जो व्यक्तिगत राष्ट्रों मे मोद्रिक अधिकारों को अन्तर्राष्ट्रीय भुगतान शेष के घाटे के लिए उपलब्ध हो सकते है |

     

    अन्तर्राष्ट्रीय तरलता की आवश्यकता एवं महत्व

    अन्तर्राष्ट्रीय तरलता की आवश्यकता मुख्य रुप से अन्तर्राष्ट्रीय भुगतानों मे शीघ्रता एवं सुविधा प्रदान करने के लिए होती है | दुसरे विश्वयुद्ध के दोरान विश्व के स्वर्ण भण्डारो का लगभग 70% भाग अमेरिका के पास केन्द्रित हो गया था | परिणामस्वरूप विभिन्न राष्ट्रों को अपने अन्तर्राष्ट्रीय भुगतानों के लिए अमेरिका पर ही निर्भर रहना पड़ा तथा अन्य राष्ट्रों के सामने अन्तर्राष्ट्रीय भुगतान के निपटारे की समस्या हो गयी | सन 1958 के बाद अमेरिका के प्रतिकूल भुगतान संतुलन हो जाने पर और विकासशील राष्ट्रों की बढती आवश्यकताओं को देखते हुए अन्तर्राष्ट्रीय तरलता की आवशयकता जटिल होती गयी |

    अन्तर्राष्ट्रीय तरलता के महत्व के निम्न कारण है |

    • पिछले वर्षो मे अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार मे काफी बढ़ोतरी हुई है | इसकी तुलना मे तरलता पर्याप्त नहीं रह पाती है | इस दशा मे अन्तर्राष्ट्रीय तरलता की आवश्यकता अधिक बढ़ गयी है |
    • अमेरिका द्वारा डॉलर सहायता मे निरंतर कमी
    • विश्व के स्वर्ण भण्डारो मे नाममात्र की बढ़ोतरी की किन्तु मांग अधिक
    • विश्व मे डॉलर व स्टर्लिग मुद्रा मे संकट
    • खनिज तेलों के दामो मे अपार वृदि
    • विकासशील राष्ट्रों की बढती हुई आवशयकता
    • विकसित राष्ट्रों द्वारा पक्षपातपूर्ण व्यवहार

     

    Answered on December 25, 2017.
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