कम्पनी के नियमो मे पार्षद सीमानियम(memorandum of association) क्या है ?

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    किसी कम्पनी के लिए पार्षद सीमानियम क्यों जरूरी है और यह किस प्रकार से काम करता है ?  इसकी सम्पूर्ण जानकारी दीजिये ?

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      पार्षद सीमानियम कम्पनी का एक महत्वपूर्ण प्रलेख होता है, जो कम्पनी के सम्बन्ध मे अनेक तथ्यात्मक सूचनाएं प्रदान करता है | यह कम्पनी का नाम, कम्पनी के उदेश्य, स्थान, उसकी पूंजी तथा सदस्यों का दायित्व आदि की जानकारी प्रदान करने वाला प्रलेख है | यह कम्पनी के कार्यक्षेत्र, अधिकार, उद्देश्य तथा कम्पनी की प्रकर्ति को प्रकट करने वाला महत्वपूर्ण प्रलेख है |

      कम्पनी अधिनियम 2013 की धारा 2(56) के अनुसार सीमानियम से आशय ऐसे कम्पनी के पार्षद सीमानियम से है जो पूर्ववर्ती किसी कम्पनी विधान अथवा इस अधिनियम के अनुसरण मे मूल रुप से बनाया गया या समय-समय पर परिवर्तित किया गया है |

      यह स्पष्ट है की सीमानियम कम्पनी का आधारभूत प्रलेख या अधिकार प्रत्र है | जिसमे कम्पनी के सम्बंधित अनेक महत्वपूर्ण सूचनाओ यथा कम्पनी का नाम ,पंजीक्रत कार्यालय का स्थान, सदस्यों का दायित्व, कम्पनी की अंश पुंजी का उल्लेख होता है |इस सीमानियम का पहला उद्देश्य अंशधारियो व त्रणदाताओ तथा कम्पनी के साथ व्यवहार करने वाले लोगो को कम्पनी के अधिकारक्षेत्र के बारे मे बताता है | जिसके आधार पर वे कम्पनी के साथ भरोसे से साथ व्यवहार कर सके | पार्षद सीमानियम का दूसरा उदेश्य कम्पनी के बाह पक्षकारो को कम्पनी की अनुबंध करने की स्थिति से अवगत कराना है |  बाह पक्षकार पार्षद सीमानियम के उदेश्य वाक्य को देखकर इस बात का पता लगा सकता है की कम्पनी किस प्रकार के अनुबंध कर सकती है और किस प्रकार के अनुबंध नहीं कर सकती है |

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      पार्षद सीमानियम का महत्व (importance of memorandum of association)

      1 पार्षद सीमानियम कम्पनी का आधार है | इसे बनाये बिना कम्पनी का समामेलन संभव नहीं है | यह वास्तव मे वह आधार है जिस पर कम्पनी का ढाचाँ निर्भर करता है |

      2 कम्पनी का सिमानियम कम्पनी के कार्यक्षेत्र को निर्धारित करता है | सीमानियम वह क्षेत्र है जिसके बाहर कोई भी कम्पनी नहीं जा सकती है |

      3 सीमानियम कम्पनी के अधिकारों का स्त्रोत है | जिसमे जिन उद्देश्यो की प्राप्ति के लिए कम्पनी को अधिकृत किया जाता है, कम्पनी उन्ही कार्यो को करने का अधिकार रखती है |

      4  पार्षद सीमानियम कम्पनी का मार्गदर्शक या पथप्रदर्शक के रुप मे माना जा सकता है |

      5 पार्षद सीमानियम से विनियोजको व त्रणदाताओ की सुरक्षा बनी रहती है | वे सीमानियम को देखकर कम्पनी की जोखिम को ज्ञात कर लेते है |

      6 सीमानियम को राष्ट्रीय हित का पोषक भी कहा जा सकता है | पार्षद सीमानियम मे उद्देश्य दिए होते है तथा किसी भी ऐसी कम्पनी का समामेलन नहीं  करवाया जा सकता जिसके उद्देश्य राष्ट्रहित मे बाधक हो |

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      पार्षद सीमानियम की कुछ महत्वपूर्ण बाते है |

      1 यह आधारभूत(fundamental) प्रलेख है इसे कम्पनी का अधिकार-प्रत्र(charter) भी कहा जाता है |

      2 यह प्रत्येक कम्पनी के लिए बनाना अनिवार्य है | तथा यह प्रत्येक कम्पनी द्वारा मोलिक रुप से तेयार किया जाता है |

      3 यह कम्पनी के अधिकार/शक्तियों की सीमाओ को निर्धारित करता है |

      4 जब किसी कम्पनी के सीमानियम का पंजीयन हो जाता है तो कम्पनी का समामेलन हुआ मन लिया जाता है |

      5 सीमानियम कम्पनी तथा इसके सदस्यों के बीच अनुबंध का निर्माण करता है |

      6 सीमानियम एक परिवर्तनीय प्रलेख है | इसमे परिवर्तन व पुनः परिवर्तन किया जा सकता है |

       

       

       

      Answered on December 19, 2017.
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