अपने ज्ञान (Knowledge) को कैसे बताए?

Knowledge कैसे प्राप्त किया जाता है| असल में ज्ञान होता है और एक व्यक्ति के जीवन में कितना महत्वपूर्ण है|

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      Knowledge को कैसे Increase करे –

      Knowledge यानी ज्ञान, जिसे आप अनुभव या यादो का एक गुछा भी कह सकते है| जो समय के कारण हमारे साथ हुआ और हमने उसे समझा और घिरे घिरे उसे सीखते चले गए| सीखने की प्रक्रिया हमेशा से ही पीड़ा दायक रही है, जब हम छोटे थे तब हमारी हड्डिया बढ़ रही थी, हर जगह दर्द होता था| पर जब हमने उस दर्द को महसूस किया तो हमने जाना की दर्द क्या होता है|

      RE: अपनी ज्ञान (Knowledge) को कैसे बताए?

       

      असल में ज्ञान, Knowledge, सीखना या इसे कोई भी नाम दे| यह बस एक चीज है वो है अनुभव या महसूस करना – जो समय के साथ होता है| असल में इस पूरी दुनिया में या यू कहें की इस पूरी Universe में अन गिनत चीजे, प्रदार्थ, उर्जा और भी कई सारी चीजे मौझुद है| जिसे समझने के लिए हमारा जीवन यक़ीनन बहुत ही छोटा या ना के बराबर है|

      उदाहरण के तौर पर – एक Research के अनुसार इस पुरे ब्रह्माण्ड में इतने तारे और गृह मौजूद है, जितने हमारी धरती पर रेट के कण भी नहीं है| और उससे भी ज्यादा रहस्य मानव शरीर में मौजूद है| तो यह सब क्या है, यह सब कुछ एक ही उर्जा से निकलते है और उसे में विलीन होते रहते है|

      सामान्य भाषा में ज्ञान उस उर्जा को समझने का एक साधन है और हमारा जीवन इतना छोटा है की हम हर चीज को अपने जीवन में करके अनुभव नहीं कर सकते है| तो हमें दूसरो के अनुभव से सिखाना होगा ताकि हम इस जीवन को बेहतर जीवन बना सके|

      Answered on November 21, 2018.
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        Knowledge कैसे प्राप्त और कैसे उसे बढाए – 

        “ज्ञान” – Knowledge 

        ज्ञान एक अनुभव है। जो व्यक्ति द्वारा स्वयं किया जाता है।

        उदाहरण :- मुझे पता नहीं है कि आग पर हाथ रखने से क्या होता है अर्थात मुझे इसका ज्ञान नहीं है। पर जब मैंने स्वयं आग को हाथ में पकड़कर देखा तो मुझे पता चला कि आग को पकड़ने पर कैसे महसूस होता है|

        अतः मुझे इसका ज्ञान है की आग को पकड़ने पर कैसा लगता है।

        सामान्यतः बोलचाल की भाषा में जानने का अर्थ ज्ञान से लिया जाता है । जानना या मालूम होना , ज्ञात होना आदि शब्दों को ज्ञान के नजदीकी संबंध रखने वाले शब्द कहे जाते हैं।

        क्या सीखे और कैसे सीखे|

         

        ज्ञान का स्वरूप प्रकाश में माना गया है। ज्ञान का स्वरूप है किसी वस्तु को प्रकाशित करना। जिस प्रकार दीपक समीपस्थ वस्तु को प्रकाशित करता है उसी प्रकार ज्ञान भी वस्तु को प्रकाशित करता है। तर्क कौमुदी में कहा गया है, “अर्थ प्रकाशो बुद्धि”।

        यानी वस्तु के प्रकाश में ही ज्ञान निहित है। यहां पर यह कहना अप्रासंगिक नहीं होगा कि यह वस्तु प्रकाशन यथार्थ और अयथार्थ दोनों ज्ञान में हो सकता है, ज्ञान का कार्य ज्ञेय वस्तुओं को प्रकाशित करना है।

        ज्ञान हमारे कार्य का आधार है । मनुष्य सही या गलत ज्ञान के आधार पर ही कार्य करता है । ज्ञान आत्मा का गुण है ( Knowledge is attribute of soul।
        ज्ञान के संबंध में निम्नलिखित बिंदुओं का स्मरण अपेक्षित है :-
        1. ज्ञान वस्तु प्रकाश हैं| 2. ज्ञान हमारे व्यवहार का आश्रय है| 3. ज्ञान आत्मा का गुण है|

        भारतीय दर्शन में ज्ञान को मुख्यतः दो भागों में विभाजित किया गया है-
        1 अनुभव ज्ञान और 2 स्मृति में ज्ञान|

        अनुभव ज्ञान वह है जिसे इंद्रियों द्वारा प्रत्यक्ष किया जाता है , अनुभूत किया जाता है और इस्मृति ज्ञान वहां है जिसे अनुभूत पदार्थ के अभाव में स्मरण द्वारा जागृत किया जाता है ।

        ज्ञान मुख्यतः तीन प्रकार के होते हैं –
        1 कौशलात्मक ज्ञान
        2 परिचयात्मक ज्ञान
        3 तथ्यात्मक ज्ञान।

        Answered on November 21, 2018.
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