भारतीय वित्तीय प्रणाली क्या है? What is Indian financial system?

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      भारतीय वितीय प्रणाली;-

      ? भारतीय सविधान के अनुच्छेद 280 में वित्त आयोग का प्रावधान किया गया गया है।इनका गठन एक अध्य्क्ष तथा चार सदस्यों से मिलकर होता है।

      ? राष्ट्रपति द्वारा वित्त आयोग के अध्यक्ष तथा सदस्यो की नियुक्ति”5 वर्ष”के लिए होती है।

      ? वित्त आयोग के अध्य्क्ष एवं सदस्यो के लिये योग्यताओं का निर्धारण संसद द्वारा किया जाता है।

      ? वित्त आयोग का सदस्य ऐसा व्यक्ति हो सकता है,जिसे सार्वजानिक क्षेत्र का अनुभव प्राप्त हो।

      ? वित्त आयोग के सदस्यों के लिये यह आवश्यक है कि वह उच्च न्ययालय के न्यायधीश होने की योग्यता रखता हो या ऐसा व्यक्ति जिसे वितीय विषयो और वितीय लेखा तथा प्रसाशन का व्यपाक ज्ञान व् अनुभव हो।

      ? पहले वित्त आयोग के अध्यक्ष के.सी नियोगी थे, जबकि वर्तमान में 14 वे वित्त आयोग के अध्यक्ष वाई वी रेडडी है।

      कार्य एवं क्षेत्रधिकार;-
      भारतीय सविधान के अनुच्छेद 281 के अनुसार वित्त आयोग को निम्लिखित कार्यो एवं दायित्वों के सन्दर्भ में अपनी सिफारिशें देनी होती है।

      1. केंद्र और राज्यो के मध्य करो के शुद्ध आगमो के विवरण के संबंध में तथा राज्यो के मध्य शुध्द आगमो के तत्सम्बन्धी भाग के आवंटन के संबंध में ।
      2. भारत के संचित निधि में से राज्यो के राजस्व में सहायता अनुदान को व्यवस्थित करने वाले सिध्दांतो के संबंध में।
      3. सुदृण वित्त के हित में राष्ट्रपति द्वारा आयोग को निर्दिष्ट किये गए,किसी अन्य विषय के सम्बन्ध में।

      Answered on April 25, 2017.
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        भारतीय वित्त प्रणाली

        भारतीय वित्त प्रणाली एक ऐसी व्यवस्था से है जिसमें व्यक्तियों, वित्तीय संस्थाओं, बैंकों, औद्योगिक कम्पनिओं तथा सरकार द्वारा वित्त की माँग होती है तथा इसकी पूर्ति की जाती है।

        भारतीय वित्त प्रणाली के दो पक्ष है, पहला माँग पक्ष तथा दूसरा पूर्ति पक्ष।

        माँग पक्ष का प्रतिनिधित्व व्यत्तिगत निवेशक, औद्योगिक तथा व्यापारिक कम्पनिओं, सरकर आदि करते है, जबकि पूर्ति पक्ष का प्रतिनिधित्व बैंक, बिमा कंपनी, म्यूच्यूअल फण्ड, तथा अन्य वित्तीय संस्थाएं करती है।

        भारतीय वित्त प्रणाली को दो भागों में बांटा गया है-1 भारतीय मुद्रा बाजार 2 भारतीय पूंजी बाजार।

        1. भारतीय मुद्रा बाजार को तीन भागों में बांटा गया हैअसंगठित बाजार, संगठित बाजार, तथा मुद्रा बाजार का उप बाजार।

        असंगठित बाजार के अंतर्गत देशी बैंकर, साहूकार, और महाजन आदि परम्परागत स्रोत आते है। ग्रामीण और कृषि साख में इसकी बहुत भूमिका होती है।

        संगठित बाजार में भारतीय रिज़र्व बैंक शीर्ष संस्था है , इसके अतिरिक्त सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक, निजी क्षेत्र के बैंक, विदेशी बैंक तथा अन्य वित्तीय संस्थाएं आती है।

        भारतीय रिज़र्व बैंक देश में मौद्रिक गतिविधियों के नियमन का नियंत्रण करता है, भारतीय रिज़र्व बैंक के दो कार्य है1. सामान्य केंद्रीय बैंकिंग कार्य तथा 2. विकास संबंधी और प्रवर्तन कार्य

        सामान्य केंद्रीय बैंकिंग कार्य के अधीन भारतीय रिज़र्व बैंक के निम्न कार्य किये जाते है

        1. करेंसी नोटों का निर्गमन, 2. सरकारी बैंकर का काम, 3. बैंकों के बैंकों का काम, 4. विदेशी विनिमय को नियंत्रित करना, 5. साख नियंत्रण एवं 6. आकड़ो का संग्रहण और प्रकाशन।

        विकास संबंधी और प्रवर्तन कार्य के अधीन भारतीय रिज़र्व बैंक के निम्न कार्य किये जाते है

        1. मुद्रा बाजार पर प्रतिबंधात्मक नियंत्रण, 2. बचतो को बैंकों व अन्य वित्तीय संस्थाओं के माध्यम से उत्पादन के लिए उपलब्ध कराना, 3. लोगों में बैंकिंग की आदत बढ़ाने के लिए प्रयास करना आदि।

        2. भारतीय पूंजी बाजार, मुद्रा बाजार से इस बात से भिन्न है कि मुद्रा बाजार अल्पावधि की वित्तीय व्यवस्था का बाजार है, जबकि पूंजी बाजार में मध्यम तथा दीर्धकाल के कोष का आदानप्रदान किया जाता है।

        भारतीय पूंजी बाजार को मोटे तौर पर दो भागों में बांटा जाता हैगिल्ड एंड बाजार और औधोगिक प्रतिभूति बाजार।

        गिल्ड एंड बाजार में रिज़र्व बैंक के माध्यम से सरकारी और अर्द्वसरकारी प्रतिभूतियों का क्रयविक्रय किया जाता है।

        गिल्ड एंड बाजार में सरकारी और अर्द्वसरकारी प्रतिभूतियों का मूल्य स्थिर रहता है।

        औधोगिक प्रतिभूति बाजार में नये स्थापित होने वाले या पहले से स्थापित औद्योगिक उपक्रमों के शेयर और डिबेंचर का क्रयविक्रय किया जाता है।

        दि पूंजी बाजार में निजी निगम क्षेत्र के नये अंशों और डिबेंचर, सरकारी कंपनी की प्राथमिक प्रतिभूति या नयी प्रतिभूतियॉं तथा सार्वजनिक क्षेत्र के बांड्स के निर्गमों का क्रयविक्रय किया जाता है, तो ऐसे बाजार को प्राथमिक पूंजी बाजार कहते है।

        द्वितीयक पूंजी बाजार के अंतर्गत स्टॉक एक्सचेंज में होने वाले क्रयविक्रय तथा गिल्ड एंड बाजार में होने वाले क्रयविक्रय आते है

        भारतीय पूंजी बाजार में पूंजी के स्रोत है:
        अंश पूंजी, ग्रहण पत्र, मर्चेंट बैंक, म्यूच्यूअल फण्ड, लीजिंग कंपनी, जोखिम पूंजी कंपनी आदि।

        भारतीय वित्तीय व्यवस्था से जुड़े कुछ महत्त्वपूर्ण तथ्य:
        भारत में वित्तीय वर्ष 1 अप्रैल से 31 मार्च तक होता है। रिज़र्व बैंक भारत का केन्द्रीय बैंक है, इसका मुख्यालय मुंबई में है। भारतीय रिज़र्व बैंक का लेखा वर्ष 1 जुलाई से 30 जून है।

        भारत में मौद्रिक निति एवं साख नीति रिज़र्व बैंक द्वारा ही बनायी जाती है और लागू की जाती है।

        भारत के विदेशी व्यापार से सम्बंधित आंकड़े भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा एकत्रित तथा प्रकाशित होते है

        भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा बैंक दर में कमी के कारण बाजार में तरलता में वृद्धि होती है

        सार्वजनिक बैंकों में भारतीय स्टेट बैंक समूह सबसे बड़ा है जो कुल बैंक जमा का लगभग 29% का नियंत्रण किया जाता है

        राष्ट्रीय कृषि तथा ग्रामीण बैंक देश में कृषि एवं ग्रामीण विकास हेतु वित्त उपलब्ध कराने वाली शीर्ष संस्था है

        भूमि विकास बैंक मूलतः दीर्घकालीन साख उपलब्ध कराने वाली संस्था है भूमि विकास बैंक का आरम्भ भूमि बंधक बैंक के रूप में 1919 .  में हुआ था

        भारतीय औद्योगिक विकास बैंक की स्थापना 1 फेब्रुअरी 1964 .  में हुआ था

        माइक्रो फाइनेंस की बढ़ती हुई माँग एवं उपयोगिता को देखते हुए इसके विनियमित विकास बैंक के लिए राष्ट्रीय कृषि ग्रामीण विकास बैंक को नियामक निकाय बनाने का सरकार का विचार है

        भारतीय बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण द्वारा बीमा कंपनी पर नियंत्रण किया जाता है और उनकी गतिविधियों पर नजर रखता है।

        मुख्य वित्तीय संस्थान:

        1. इम्पीरीअल बैंक ऑफ इंडिया
        2. भारतीय रिजर्व बैंक
        3. भारत के औद्योगिक वित्त निगम
        4. औद्योगिक विकास बैंक ऑफ इंडिया
        5. भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी)
        6. भारत का सामान्य बीमा
        7. भारतीय स्टेट बैंक
        8. औद्योगिक रिकन्स्ट्रक्शन बैंक ऑफ इंडिया (आईआरबीआई) अब (औद्योगिक निवेश बैंक ऑफ इंडिया)
        9. राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड)
        10. लघु उद्योग विकास बैंक ऑफ इंडिया (एसआईडीबीआई)
        11. राष्ट्रीय आवास बैंक (एनएचबी)
        12. यूनिट ट्रस्ट ऑफ इंडिया (यूटीआई)
        13. जोखिम पूंजी और प्रौद्योगिकी वित्त निगम लिमिटेड (आरसीटीसी)
        14. टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट एंड इंफॉर्मेशन कंपनी ऑफ इंडिया लिमिटेड (टीडीआईसीआई)
        15. पर्यटन वित्त निगम निगम लिमिटेड (टीएफसीआई)
        16. शिपिंग क्रेडिट एंड इंवेस्टमेंट कंपनी ऑफ इंडिया लिमिटेड (एससीआईसीआई)
        17. डिस्काउंट और फाइनेंस हाउस ऑफ इंडिया लिमिटेड (डीएफएचआई)                                                                 18. क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक

        Answered on April 26, 2017.
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