भारत में राज्य के नीति-निर्देशक-सिद्धांत क्या हैं?

 42 वेसंशोधन में कौन से नए सिद्धांत शामिल हैं?

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    राज्य के नीतिनिर्देशकसिद्धांत

    राज्य के नीति निर्देशक तत्व भारतीय संविधान की अनुपम विशेषता है। भारतीय संविधान में इन तत्वों का समावेश इस प्रकार से किया गया है कि भारत सरकार तथा राज्यें सरकारें इन तत्वों के अनुसार अपनी कार्य नीति को ढालने का प्रयत्न करें जिससे जनता का जीवन सुखी और उन्नत हो सकें। वे विश्व शांति एवं सुरक्षा के कार्य में योगदान कर सकें इन सिंद्धान्तों का आधार संविधान की प्रस्तावना है जिसके अनुसार भारत के पत्येक राज्य का उद्देश्य पत्येक व्यक्ति के लिए सामाजिक, आर्थिक और राजनैतिक न्याय प्राप्त करना है। यदि कानून निर्माता तथा सरकार इन सिंद्धान्तों का पालन न करें तो उनके विरुद्ध कोई क़ानूनी कार्यवाही नही की जा सकती, परन्तु निर्वाचन के समय अवश्य ही उनको जनता के सम्मुख उत्तरदायी होना पड़ेगा। डॉक्टर आंबेडकर ने इन सिद्धांतों को संविधान में रखने का कारण यह बताया है कि केवल संसदीय लोकतंत्र ही स्थापित करना काफी नहीं था जब तक कि आर्थिक लोकतंत्र भी कायम न हो जाय।

    निर्देशक सिद्धांतों का वर्गीकरण:- संविधान में जो नीतिनिर्देशक सिद्धांत दिए गए उनको पांच वर्गों में बांटा जा सकता है:-

    I. आर्थिक सिद्धांत (Economic Principles)- इस वर्ग में निम्नलिखित सिद्धांत सम्मिलित है:-

    1. पुरुष और स्त्री सभी नागरिकों को जीवन के पर्याप्त साधन समान रूप से प्राप्त करने का अधिकार है।
    2.
    समुदाय का भौतिक सम्पत्ति का स्वामित्व और नियंत्रण इस प्रकार हो कि सामूहिक हित हो।
    3.
    आर्थिक व्यवस्था इस प्रकार चले कि धन और उत्पादन के साधनों का सर्वसाधारण के लिए अहितकर केन्द्रीयकरण न हो।
    4. पुरुष और स्त्री दोनों के लिए समान कार्य के लिए समान वेतन हो।
    5.
    श्रर्मिक पुरुषों और महिलाओं के स्वास्थ्य शक्ति का , बालकों की सुकुमार अवस्था का दुरूपयोग न हो तथा आर्थिक आवश्यकता से विवश नागरिकों को ऐसे रोजगार में न लगना पड़े जो उनकी आयु तथा शक्ति के अनुकूल न हो ।
    6.
    सब आदमी काम पा सकें, शिक्षा प्राप्त कर सकें।
    7.
    शौशव और किशोर अवस्था का शोषण से तथा नैतिक और आर्थिक पतन से संरक्षण हो।
    8.
    सब श्रर्मिकों को निर्वाह योग्य मजदूरी मिल सकें, जिससे वह अपना जीवन स्तर ऊंचा रख सकें।
    9.
    राज्य इसका पूर्ण प्रयत्न करें और ऐसे नियम निर्मित करें जिसमें व्यक्तियों को अपनी इच्छानुसार ही कार्य करना पड़े और महिलाओं को प्रसूति अवस्था में सहायता प्राप्त हो सकें।
    10.
    कुटीर उघोगों को बढ़ाया जा सकें।
    11.
    राज्य कृषि और पशुपालन को आधुनिक वैज्ञानिक ढ़ग से संगठित करने का प्रयत्न करें

    II. सामाजिक सिद्धांत(Social principles) – सामाजिक उन्नति सम्बन्धी सिद्धांत निम्नलिखित है:-

    1. राज्य जनता के दुर्बल वर्गों, विशेषया अनुसूचित जातियां और जन जातियां के अर्थ संबंधी हितों की सावधनी से रक्षा करेगा।
    2.
    राज्य संविधान लागू होने से दस वर्ष के अंदर चौदह वर्ष की आयु तक के समस्त बालकों के लिए नि:शुल्क और अनिवार्य शिक्षा का प्रबंध करेगा और नशीले तथा हानिकारक मदों और षधियों का निषेध करेगा।
    3.
    राज्य देश भर में नागरिकों के लिए एक समान व्यवहारसंहिता बनाएगा

    III.  न्याय सम्बन्धी सिद्धांत (Judicial Principles)- ये सिद्धांत ऐसे है जिनमें न्याय का स्तर ऊंचा होने में सहायता मिलेगी:-

    1. राज्य इस बात का प्रयत्न करेगा की ग्राम पंचायतों का अधिक ग्रामों में संगठन हो और उन्हें ऐसे अधिकार दिए जिनसे वे स्वायत्त शासन की इकाइयों के रूप में कार्य कर सकेंमहात्मा गांधी का मत था कि शासन के सम्बन्ध में अधिक से अधिक विकेंद्रीकरण की नीति प्रयुक्त की जानी चाहिए और ग्राम पंचायतों का संगठन करके ग्रामों को आत्मनिर्भर बना देना चाहिए।
    2.
    राज्य न्यायपालिका को कार्यकारिणी से पृथक करने का प्रयत्न करेगाइसका उद्देश्य यह है कि न्यायाधीश प्रत्येक मामले की सुनवाई स्वतंत्र और निष्पक्ष रूप से कर सकें उन पर न किसी का दवाब हो न हस्तक्षेप। जिला मैजिस्ट्रेट और उसके नीचे के अधिकारी को शासन और न्याय दोनों प्रकार के अधिकारों के प्राप्त होने से बहुधा ठीक न्याय नहीं हो सकता

    IV.  सांस्कृतिक सिंद्धांत (Cultural Principles)- इन सिंद्धान्तों से राज्य का दायित्व होगा कि प्रत्येक स्मारक, कलात्मक या ऐतिहासिक रुचि के स्थान या वस्तु को नष्ट होने से या हटाये जाने से बचाए

    V.  अंतर्राष्‍ट्रीय शांति और सुरक्षा की उन्नति राज्य अंतर्राष्‍ट्रीय शांति और सुरक्षा की उन्नति के लिए निम्नलिखित बातों का प्रयत्न करेगा:-

    1. राष्ट्रों के बीच न्याय और सम्मानपूर्ण संबंधों को बनाए रखने का,
    2.
    संगठित लोगों को एक दूसरे से व्यवहारों से अंतर्राष्‍ट्रीय विधि और संधियों के प्रति आदर बढ़ाने का,
    3.
    अंतर्राष्‍ट्रीय झगड़ों का मध्यस्थ द्वारा निपटने का,
    4.
    अंतर्राष्‍ट्रीय शांति और सुरक्षा को बनाए रखने का,

    राज्य के नीतिनिर्देशक सिद्धांतों में वृद्धि-: 42 वें संशोधन द्वारा 12 सिंद्धान्तों में नए 4 सिद्धांत शामिल किये गये है

    1. राज्य अपनी निति का संचलन इस प्रकार करेगा कि बच्चों को स्वस्थ, स्वतंत्र और प्रतिष्टापूर्ण वातावरण में अपने विकास के लिए अवसर और सुविधाएं प्राप्त हो।
    2.
    राज्य ऐसी कानून प्रणाली के प्रचलन की व्यवस्था करेगा जो समान अवसर के आधार पर न्याय का विकास करेंराज्य उपयुक्त कानून या अन्य ढ़ंग से आर्थिक दृष्टि से कमजोर व्यक्तियों के लिए मुफ्त कानूनी सहायता की व्यवस्था करने का प्रयत्न करेगा।
    3. राज्य उपयुक्त कानून द्वारा या अन्य ढंग से श्रमिकों को उघोगों के प्रबंध में भागीदार बनाने के लिए पग उठायेगे।
    4.
    राज्य वातावरण की सुरक्षा और विकास करने तथा देश के वन और वन्यजीवन को सुरक्षित रखने का प्रयत्न करेगा

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