लेखांकन मानक 2(accounting standard 2) क्या है ?

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    लेखाशास्त्र मे लेखांकन मानक 2 किसके अंतर्गत आता है तथा इसकी जानकारी विस्तार मे दीजिए ?

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      लेखांकन मानक 2(accounting standard 2) स्टॉक के मूल्यांकन के अंतर्गत आता है | क्योकि स्टॉक किसी भी व्यापार के लेखांकन का सबसे महत्पूर्ण पहलु है | स्टॉक का मूल्यांकन केसे किया जाये इसके सम्बन्ध मे लेखांकन मानक 2, 1.4.1999 को तथा इसके बाद की अवधि के लिए लागु हुआ है | यह लेखांकन मानक स्टॉक की लागत के निर्धारण करने के विवरण सहित वितीय विवरणों मे स्टॉक को उसके इस प्रकार निर्धारित किये गये लागत मूल्य को उसके शुद्ध वसुलीयोग्य मूल्य तक उसमे आवश्यक किसी भी  कमी का वर्णन करता है |

      क्षेत्र(scope)

      यह लेखांकन मानक निम्न पर लागु नहीं होता है |

      1. प्रत्यक्षतः सम्बंधित सेवा अनुबंधों सहित निर्माणी ठेकों के अंतर्गत उत्पन निर्माणाधीन

      कार्य(W.I.P.) क्योकि इस हेतु लेखांकन मानक-7 (AS-7 : accounting for construction contracts) लागु होता है |

      1. सेवा प्रदाताओ के व्यवसाय के साधारण गतिविधियों मे उत्पन निर्माणाधीन कार्य (w.i.p. of service providing business entities)
      2. व्यापारिक रहतिये के रुप मे रखे गये अंश,त्रणपत्र तथा अन्य वितीय विलेख |
      3. पशुधन, क्रषि उत्पाद तथा वन उत्पाद सहित ऐसे उत्पादों के स्टॉक, खनिज तेल, खनिज अयस्क ययह उस सीमा तक गेसे जहा उन्हें उनकी सर्वमान्य विशेष मूल्यांकन विधियों पर मापा जाता हो |

       

      स्टॉक का मूल्यांकन(measurement of inventories)

      स्टॉक का मूल्यांकन लागत मूल्य तथा शुद्ध वसुलीयोग्य मूल्य, दोनों मे से जो कम हो उस मूल्य पर स्टॉक का मूल्यांकन किया जाता है |

       

      स्टॉक की लागत

      1 क्रय की सभी लागतों

      2 परिवर्तन की लागतों

      3 ऐसी ही अन्य लागतों का समावेश किया जाना चाहिए |

      क्रय की लागतें(costs of purchase)

      क्रय की लागतों मे शुल्को तथा करो, आवक भाडा(inward freight) तथा प्राप्ति से प्रत्यक्षतः जुड़े अन्य व्ययों सहित क्रय मूल्य का समावेश होता है | व्यापारिक बट्टा, रिबेट, डयूटी ड्रा बैक तथा ऐसी ही मदों को क्रय लागत से घटाया जाता है |

       

      परिवर्तन की लागतें(costs of conversion)

      स्टॉक मे परिवर्तन की लागतें जो उत्पाद की ईकाईयो से प्रत्यक्षतः सम्बन्धित लागतों का प्रतिनिधित्व करती है | जेसे प्रत्यक्ष श्रम व ऐसे स्थायी तथा परिवर्तनशील प्रत्यक्ष व्ययों की मदे है जिनको सामग्रीयो को निर्मित माल मे बदलने मे खर्चा कहा जाता है | परिवर्तन की लागतों मे स्थायी निर्माणी उपरिव्ययों को तभी शामिल किया जाता है जब यह भार उत्पादन की सामान्य क्षमता पर आधारित होता है |

       

      अन्य लागतें(other costs)

      अन्य लागतों को केवल उस सीमा तक ही स्टॉक की लागत मे शामिल किया जाता है जो स्टॉक के उत्पादन मे सम्बंधित हो | ब्याज तथा अन्य त्रण लागतों को सामान्यतः स्टॉक मे सम्बंधित न मानते हुए आम तोर से ध्यान से नहीं रखा जाता है | इसलिए इसे  स्टॉक की लागत मे शामिल नहीं  किया जाता है |Image result for indian (accounting standard 2 image

       

      स्टॉक की लागत मे निम्न को शामिल नहीं किया जाता है | 

      1. क्षय सामग्रियों |
      2. भंडारण लागते, जब तक की वे लागते आगे निर्माणी चरण पर जाने से पूर्व उत्पादन की प्रकिर्या मे आवश्यक न हो |
      3. प्रशासनिक उपरीव्यय जो स्टॉक को उनकी विधमान स्थिति व दशा मे लाने के प्रति योगदान नहीं करते|
      4. विक्रय व वितरण लागते |

       

      लागत के मापांकन हेतु तकनीक

       लागत के मापांकन हेतु प्रथम आवक प्रथम जावक(FIFO) विधि, भारित ओसत लागत विधि, प्रमाप लागत विधि या फुटकर विधि का प्रयोग करना चाहिए |

      Answered on December 20, 2017.

      Good answer. Thank you

      on October 1, 2018.
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