स्वरोजगार से क्या अभिप्राय है? What does the self-employed mean?

स्वरोजगार के लाभ और हानियां कौन कौन सी है?

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      स्वरोजगार (Self employment)

      स्वरोजगार से अभिप्राय अपना कोई निजी काम धंधा चालू करना है प्रत्येक व्यक्ति सरकार की नौकरी प्राप्त नहीं कर सकता। उसे रोजीरोटी कमाने के लिए अपना कोई काम धंधा आरम्भ करना पड़ता है इसे ही स्वरोजगार कहते है।

      स्वरोजगारसे अभिप्राय है, स्वयं के लिए कोई काम उत्पन्न करना ताकि किसी आर्थिक लाभदायक क्रिया में व्यस्थ हो सकें और अपनी उत्पादनशीलता, कौशल क्षमता को आजीविका कमाने के लिए उपयोग में ला सकें। एक स्वरोजगार संपन्न व्यक्ति स्वयं का स्वामी होता है, परन्तु स्वउघमिता केवल उनको माफिक बैठाती है जोकि परिश्रमी है तथा चुनौतिया जैसी भी आये, उनका मुकाबला करने के लिए अग्रसर होने की क्षमता रखते हो। स्वरोजगार एक निश्चित क्रिया है जोकि न केवल एक व्यक्ति का विकास करती है, अपितु समाज को भी निश्चित लाभ पहुंचाती है क्योंकि वह नवयुवकों में बेरोज़गारी की समस्या का सरल हल प्रदान करता है। स्वयं के अतिरिक्त स्वरोजगार व्यक्ति दूसरों को भी रोजगार के अवसर प्रदान कर सकता हैस्वरोजगार का दायरा तीन क्षेत्रों में रहता है अर्थात उघोग, सर्विस तथा व्यापार हलाकि, स्थान अथवा पद सीमित होते है, परन्तु उघोग तथा धंधो में सभी के लिए स्वरोजगार में लगने के लिए क्षेत्र खुला हैस्वरोजगार के क्षेत्र में बड़ी संख्या में अवसर उपलब्ध होते है। उनमें से अपनी योग्यता, रूचि तथा आर्थिक साधनों के अनुसार चुना जा सकता है

      स्वरोजगार के लाभ

      जब व्यक्ति रोजगार प्राप्त करने में असफल होता है, तो यह और भी आवश्यक हो जाता है कि वह स्वरोजगार ढूंढेस्वरोजगार के कारण वह रोजगार देने वालों द्वारा किये जाने वाले शोषण से बच जाता हैवास्तव में वह स्वयं ही स्वामी बन जाता है। अपने समय तथा धन को पूर्णतम सीमा तक काम में ला सकता हैस्वरोजगार में पूर्ण स्वतंत्रता उपलब्ध होती है

      कोई भी इसके काम के हस्तक्षेप नही कर सकताबिना किसी हिचकिचाहट के वह अपने हित में योजना बना कर उस पर अमल कर सकता हैस्वरोजगार रत व्यक्ति को कठिन परिश्रम के लिए श्रम तथा साधनों के अनुपात में उपहार प्राप्त होता है। इसके विपरीत कारखानों में सभी को समान आजीविका मिलती हैचाहे वह अधिक काम भी करे, परन्तु स्वरोजगार रत व्यक्ति को कठिन परिश्रम के लिए तुरंत पारितोषिक मिलता हैव्यवसायों में बढ़ोतरी के साथसाथ आय में वृद्धि होती है तथा उत्कर्ष दिखाई देता हैहमारे देश में इसके अनेक उदाहरण है की छोटे कामों की तुलना में स्वरोजगार कहीं अधिक अच्छें है। यह बताना उचित होगा कि स्वरोजगार के लिए कठिन परिश्रम, चुनौतियां का सामना करने का साहस, धेर्य व्यवसायिक कुशाग्र बुद्धि, नेतृत्व की आवश्यकता होती है

      लाभ

      1. स्वरोजगार में अनुयायी बनने की अपेक्षा नेता बनने के अधिक अवसर है।
      2.
      स्वरोजगार में आय की संभावनाएं असीमित होती है।
      3.
      स्वरोजगार में व्यक्ति सदा सक्रिय रहता है और अपने विचारों को कार्यान्वित कर सकता है।
      4.
      इसमें काम करने में कोई हिचकिचाहट तथा रूकावट नही होती है।
      5.
      स्वरोजगार में एक उघमी व्यक्ति स्वतंत्रतापूर्वक कार्य कर सकता है।
      6.
      काम करने का वातावरण अपने अधीन रहता है

      स्वरोजगार की हानियां

      स्वरोजगार में हमेश जोखिम होता है। स्वरोजगात रत व्यक्ति अपने व्यवसाय के लिए स्वयं पूरी तरह उत्तरदायी होता हैउसकी आय सुनिश्चित नहीं होती। उसे अनिश्चित भविष्य का मुकाबला करना पड़ता है

      हानियां

      1. उघमकर्ता पर उत्तरदायित्व का अधिक भार होना

      2. काम के लम्बे थका देने वाले तथा अनिश्चित घंटे

      3. वित्तीय समस्याओं का सदा सामने होना तथा स्थायी आय की अनिश्चिता होना

      4. उपयुक्त ढंग से कार्य संपादन के लिए समय की कमी होना

      5. अनिश्चित भविष्य का होना।
      6.
      व्यक्ति सदा सिखिया रहता है।
      7.
      दफ्तरी काम का बोझ अधिक रहता है।
      8.
      अपना काम दूसरों को सौंपना कठिन होता है

      शानदार

      on May 23, 2017.
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