कैपिटल गेन क्या होता हैं? What is Capital Gain in Income Tax (Hindi)

Income Tax में कैपिटल गेन का क्या मतलब होता हैं? Capital Gain कब और कैसे कैलकुलेट किया जाता हैं? कैपिटल गेन के सम्बन्ध में इनकम टैक्स के क्या नियम हैं?

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      Capital Gain Meaning in Hindi

      Capital gain hindi

      Capital gain का मतलब होता है, पूंजीगत सम्पति(Capital Assets) के विक्रय से प्राप्त लाभ| सामान्य शब्दों में कहें तो वे सभी प्रकार की पूंजीगत सम्पतिया (Capital Assets) जिसकी बिक्री से लाभ उत्पन्न होता है, उस लाभ को Capital Gain कहा जाता है| इस लाभ पर अर्थात Capital gain पर उस साल में कर लगाया जाता है, जिस साल में पूंजीगत सम्पति का हस्तांतरण होता है|

      Capital Assets – पूंजीगत सम्पति

      पूंजीगत संपत्तियों से तात्पर्य:- भूमि, भवन, घर की संपत्ति, वाहन, पेटेंट, ट्रेडमार्क, पट्टे अधिकार, मशीनरी, और आभूषण वे सभी मूल्यवान वस्तुए जिनकी बिक्री की जा सकती हो, लेकिन वे Business and Profession से जुडी नहीं होंनी चाहिए|

      सरल शब्दों में कहाँ जाए, तो वे मूल्यवान संपतिया जो व्यापार और पेशे से सम्बन्धित नहीं है, वे Capital Assets कहलाती है| Capital Assets दो प्रकार की होती है:- 

      1. Short-Term Capital Asset -अल्पकालिक पूंजीगत सम्पति

      वो पूंजीगत सम्पति जो 3 साल से कम स्वामित्व में रही हो| अर्थात सम्पति के स्वामित्व में आने के बाद 3 वर्षो से पहले उसे हस्तांतरित कर दिया जाए तो वह Short-Term Capital Asset कहलाती है और उस बिक्री पर प्राप्त होने वाला लाभ Short term Capital Gain कहलाता है| 

      2. Long-Term Capital Assets – दीर्धकालीन पूंजीगत सम्पति

      वो पूंजीगत सम्पति जो 3 साल से अधिक स्वामित्व में रही हो, वो Long-Term Capital Assets कहलाती है और इसकी बिक्री पर प्राप्त होने वाला लाभ Long term Capital Gain कहलाता है| 

      Note:- यह नियम केवल चल सम्पतियो के लिए है| मतलब वे संपतिया जिन्हें एक स्थान से दुसरे स्थान पर लाया और ले जाया जा सकता है, वे चल संपतिया कहलाती है|

      2017-18 के वित्तीय वर्ष से अचल संपत्ति यानी वो सम्पति जिसे एक जगह से दूसरी जगह Transfer नहीं किया जा सकता वो अचल सम्पति कहलाती है, जैसे:- भूमि, भवन और घर की संपत्ति आदि के सम्बन्ध में 3 वर्ष की जगह 2 वर्ष का नियम है| उदाहरण के लिए, यदि कोई व्यक्ति भूमि संपत्ति को अपने पास 2 वर्षो से कम अवधि के लिए रखकर बेचता हैं, तो प्राप्त लाभ Short-Term Capital gain होता है और यदि 2 वर्षो से ज्यादा अवधि के लिए रखकर बेचता है, तो वह Long-Term Capital gain  कहलाता है| बशर्ते संपत्ति 31 मार्च, 2017 के बाद बेची जाए।

      कुछ पूंजीगत सम्पतियो पर 12 माह यानी 1 वर्ष का नियम भी लागु होता है|

      Calculation of Capital Gain – पूंजीगत लाभ की गणना

      कैपिटल गेन ज्ञात करना बहुत ही आसान है| आप नीचे दी गई विधि से Capital gain की Calculation कर सकते है:-

      Short-Term Capital Gain:-

      1. सबसे पहले पूर्ण मूल्य यानी  Sales Price को ले|
      2. उसके बाद Sales Price में से निम्न राशियों को घटा दे:- सम्पति के हस्तांतरण के संबंध में पूरी तरह और विशेष रूप से खर्च किए गए व्यय, सम्पति की लागत और सुधार की लागत|
      3. उसके बाद जो राशी प्राप्त हो उसमे से धारा 54, 54 EC, 54F और 54B के तहत प्राप्त छूट को घटा ले|
      4. इसके बाद जो राशी बचती है, वह अल्पकालिक पूंजी लाभ (Short-Term Capital Gain) कहलाती है|       

      Long-Term Capital Gain:-

      1. सबसे पहले पूर्ण मूल्य यानीं Sales Price को ले|
      2. उसके बाद Sales Price में से निम्न राशियों को घटा दे:- सम्पति के हस्तांतरण के संबंध में पूरी तरह और विशेष रूप से खर्च किए गए व्यय, सम्पति की अनुक्रमित लागत (Indexed cost of acquisition) और सुधार की अनुक्रमित लागत (Indexed cost of improvement).
      3. उसके बाद जो राशी प्राप्त हो उसमे से धारा 54, 54 ECE, 54F और 54B के तहत प्राप्त छूट को घटा ले|
      4. इसके बाद जो राशी बचती है, वह दीर्धकालीन पूंजी लाभ (Long-Term Capital Gain) कहलाती है|

       

      Answered on September 7, 2017.
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