Jurisprudence of Indian Cyber law – भारतीय साइबर कानून

Jurisprudence of Indian cyber law in hindi, Full Information About Cyber law.

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      भारतीय साइबर कानून – Indian Cyber law

      आज के युग में साइबर क्राइम बहुत तेजी से बढ़ रहा है, कोई भी व्यक्ति अपने घर में बैठ कर किसी दुसरे व्यक्ति के अकाउंट से पैसे निकाल देता है, कंप्यूटर से पर्सनल जानकारी ले लेता है या इलेक्ट्रॉनिक डीवाइस को हैक करता है, तो एसी घटनाएँ साईबर क्राइम के अंतर्गत आती है|

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      पहले चोर ATM Card को Card Cloning करके पैसे निकल लेते थे, लेकिन अब Bank ने पुराने ATM Card को नये Chip Based EMV Debit Card से बदल दिया है जिससे कोई छेड़छाड़ नहीं हो सकती| वर्तमान में ऐसे मामले बहुत गंभीर हो गये है, इसलिए बहुत सारी एजेंसिया इस पर निगरानी बनाए हुए है|

       

      साइबर जुर्म और उसके कानून निम्न प्रकार से है –

      Hacking – हैकिंग

      हैकिंग का अर्थ किसी कंप्यूटर, इलेक्ट्रोनिक डिवाइस या किसी नेटवर्क में बिना अनुमति के घुसकर कंप्यूटर के डेटा से छेड़छाड़ करना और नुकसान पहुँचाना, अगर हैकर का उद्देश्य केवल हैकिंग करना है और नुकसान नहीं पहुचाना है फिर भी ऐसी घटना साइबर क्राइम के अंतर्गत आती है, जिनके लिए साइबर कानून बनाए गये है|

      कानून – Law

      • IT Act 2008 की धारा 43 (ए), धारा 66
      • IPCC की धारा 379 और 406

      सजा – Punishment

      5 लाख रुपय तक का जुर्माना या 3 साल की जेल|

       

      वायरस फैलाना – Spreading the Virus

      आमतोर पर लोग अपने कंप्यूटर पर आये वायरस और स्पाईवेयर पर ध्यान नहीं देते है, जिसके कारण वायरस उनके कंप्यूटर से होते हुए दुसरे कंप्यूटर में चला जाता है| ऐसा वायरस बनाने वालो की पूरी इंडस्ट्री है, जो लोगों के कंप्यूटर सिस्टम को नष्ट कर देते है|

      कानून – Law

      • IT Act 2008 की धारा 43 (सी), धारा 66
      • IPCC की धारा 268
      • देश की सुरक्षा को खतरा पहुंचाने के लिए फैलाए गए वायरसों साइबर आतंकवाद कहलाता है जिसले लिए धारा 66 (एफ) लागू होती है|

      सजा – Punishment

      साइबर आतंकवाद से जुड़े मामलों में उम्र कैद। अन्य में 3 साल जेल या जुर्माना।

      अगर आप Internet का इस्तेमाल करते है, आपके लिये जानना जरुरी है की – Dark Web और Deep Web क्या होता है|

       

      डेटा की चोरी – Data theft

      किसी व्यक्ति, कंपनी, संगठन आदि के तकनीकी सिस्टम से निजी या गोपनीय सूचनाओं की चोरी को डेटा की चोरी कहते है। अगर कोई व्यक्ति किसी की भी तकनिकी जानकारी को चुराता है तो वह साइबर क्राइम कर रहा है, ऐसे क्राइम को गंभीरता से लिया जाता है| सामान्यत ऐसी घटनाएँ कॉल सेंटरों, प्राइवेट कंपनियों आदि में देखने को मिल जाती है|

      कानून – Law 

      • IT Act 2008 की धारा 43 (बी), धारा 66 (ई), 67 (सी)
      • IPCC की धारा 379, 405, 420
      • कॉपीराइट कानून

      सजा – Punishment

      3 साल जेल या 2 लाख का जुर्माना या फिर दोनों|

      पढ़े – Internet कैसे काम करता है

       

      पहचान की चोरी – Identity theft

      जब कोई व्यक्ति किसी दूसरे व्यक्ति की पहचान से जुड़े डेटा या जानकारी का उपयोग करके उस व्यक्ति को किसी भी प्रकार की हानि पहुचाता है तो इसे पहचान की चोरी कहते है। उदाहरण के तौर दूसरों के क्रेडिट कार्ड नंबर, आधार नंबर, ई-कॉमर्स ट्रांजैक्शन पासवर्ड आदि का इस्तेमाल करके फायदा उठाता है तो यह जुर्म है| अगर आप किसी अन्य व्यक्ति के नाम से SIM उठाते है तो भी यह एक जुर्म है|

      कानून – Law 

      • IT Act 2008 की धारा 43, 66 (सी)
      • IPCC की धारा 419 का इस्तेमाल मुमकिन

      सजा – Punishment

      3 साल जेल या 1 लाख रुपये तक का जुर्माना या फिर दोनों|

       

      परेशान करना – Torture

      अगर कोई व्यक्ति सोशल नेटवर्किंग वेबसाइटों, E-Mail, Whatsapp आदि के जरिये किसी को भी परेशान करता है, या धमकाता है तो यह मानसिक प्रताड़ना और साइबर क्राइम के दायरे में आता है।  कानून

      • IT Act 2009 की धारा 66 (ए)

      सजा – Punishment

      3 साल तक की जेल या जुर्माना या फिर दोनों|

      Answered on December 26, 2018.

      Nice Post About Indian Cyber Crime, Law and Punishment

      on December 26, 2018.

      Thank you for giving such information about Cyber law

      on December 26, 2018.
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