ITR (इनकम टैक्स रिटर्न) क्या होता हैं? रिटर्न क्यों भरते हैं?

Income Tax Return Kya Hota Hai? Income Tax Return Kyo File Kiya Jata Hai? Income Tax Return Bharne Ke Kya Fayde Hai?

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      Income Tax Return

      इनकम टैक्स एक प्रकार का प्रत्यक्ष कर हैं जो कि किसी भी व्यक्ति या संस्था की Income या आय पर लगाया जाता हैं| इनकम टैक्स, आयकर अधिनियम के तहत लगाया जाता हैं और Income Tax इसी अधिनियम के नियमों और प्रावधानों के अनुसार लगाया जाता हैं|

      Income टैक्स अधिनियम के प्रावधान बहुत ही जटिल हैं और टैक्स लगाने के लिए सबसे पहले नियमों के अनुसार विभिन्न प्रकार की गणनाएँ जैसे Income कैलकुलेट करना, छूट सम्बन्धी गणनाएँ, TDS गणनाएँ, टैक्स रेट आदि बहुत सारी Calculation के बाद Income tax का निर्धारण होता हैं|

      Income Tax Return एक प्रकार का विवरण होता हैं जो कि प्रत्येक फाइनेंसियल इयर के अंत में Due Date तक निश्चित फॉर्म्स में फाइल किया जाता हैं| इनकम टैक्स के नियमों के अनुसार कैलकुलेट किये गए आय का विवरण और  टैक्स का पूरा विवरण Income Tax Return के रूप में प्रत्येक वर्ष के अंत में फाइल किया जाता हैं|

      Income Tax Return से सम्बंधित FAQs

      Answered on July 9, 2018.
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        आयकर (आईटी) रिटर्न:

        आयकर रिटर्न(ITR) एक ऐसा फॉर्म है जिसका इस्तेमाल आयकर विभाग में आयकर लगाने के लिए किया जाता है। कर रिटर्न पूर्वनिर्धारित प्रारूप में होता है जहां कर की गणना करने के लिए इस्तेमाल किए गए आय के आंकड़े के अनुसार खुद आयकर देता द्वारा दस्तावेजों में लिखे जाते हैं। आयकर रिटर्न फॉर्म के विभिन्न रूप आईटीआर 1, आईटीआर 2, आईटीआर 3, आईटीआर 4, आईटीआर 5, आईटीआर 6 और आईटीआर 7 शामिल हैं। आयकर रिटर्न फॉर्म मूल्यांकनकर्ता की आय के स्रोत और निर्धारिती की श्रेणी के मानदंडों के आधार पर भिन्न होते हैं।

        आयकर अधिनियम, 1961 और 1962 के अनुसार, नागरिकों को हर वित्तीय वर्ष के अंत में आयकर विभाग आयकर में रिटर्न दाखिल करने के लिए बाध्य करता है। इन रिटर्न को नियत तारीख के पहले दाखिल किया जाना चाहिए, जो कि साल के दौरान, चाहे मजदूरी, ब्याज, लाभांश, पूंजी लाभ या अन्य मुनाफे के माध्यम से आय प्राप्त हुई हो।

        क्यों रिटर्न फाइलिंग अनिवार्य है:

        1 यदि आप एक निवासी व्यक्ति हैं और भारत के बाहर स्थित किसी संस्था में संपत्ति या वित्तीय रुचि है। तो आप को आपकी आयकर रिटर्न फाइल करना आवश्यक हैं।

        2 जब आप किसी धार्मिक उद्देश्यों या किसी अनुसंधान संघ या समाचार एजेंसी, राजनीतिक दल, शैक्षिक या चिकित्सा संस्थान, ट्रेड यूनियन के लिए ट्रस्ट के तहत रखी गई संपत्ति से प्राप्त, आय प्राप्त होने पर आपको आयकर रिटर्न दाखिल करने की आवश्यकता है, न कि लाभ विश्वविद्यालय या शैक्षिक संस्था, एक अस्पताल के लिए आवश्यक नहीं हैं।

        3 किसी वीज़ा के लिए आवेदन करने के समय रिटर्न फाइलिंग का प्रमाण भी आवश्यक होता है।

        4  किसी ऋण को लेने  के लिए, आवेदन करते समय  रिटर्न फाइलिंग का प्रमाण भी आवश्यक होता है।

        कर रिटर्न दाखिल करने के   फायदे:

        1 यदि आप विदेशी संपत्तियों के मालिक हैं तो आईटीआर अनिवार्य है।

        2 किसी भी कर कटौती का दावा करने के लिए आईटीआर की आवश्यकता है।

        3 आप आसानी से स्वीकृत ऋण प्राप्त कर सकते हैं

        4 आपको किसी भी कर रिफंड का दावा करने के लिए आईटीआर की आवश्यकता होगी।

        5 यदि आप इक्विटी मार्केट में निवेश कर रहे हैं और बेच रहे हैं या शेयर खरीद रहे हैं, तो आयकर रिटर्न भरना आपके लिए फायदेमंद हो सकता है।

        6 व्यावसायिक संगठनों के लिए पात्र बनने के लिए आयकर रिटर्न आवश्यक हैं।

        Answered on April 5, 2017.
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          सरकार के लिए tax system जितना पेचीदा है उतना ही हमारे लिए है भी क्योंकि आम लोगो को इस बारे में बहुत कम जानकारी होती है और वैसे भी भारत में इतने कम लोगो के tax pay करने के पीछे एक मेजर कारण ये भी है कि लोगो की कितनी आमदनी हो रही है इस पर नजर रख पाना बेहद कठिन प्रक्रिया होती है क्योंकि अक्सर ग्रामीण इलाकों में और बाकि जगहों पर कैश में अधिक से अधिक लेन देन होते है इसलिए अभी 2016 के बजट में इस बाद का ध्यान रखा गया है कि कैश में होने वाले लेन देन की सीमा को बेहद कम कर दिया जाये ताकि अधिक से अधिक लोग इलेक्ट्रॉनिक तरीके से पेमेंट करें इस से होने वाले लेन देन पर नजर रखी जा सकती है और आधार कार्ड , पैन कार्ड आदि को bank account से लिंक करवाना भी अनिवार्य करने की कोशिश की जा रही है ताकि होने वाले लेन देन पर नजर रखी जा सके | सरकार द्वारा tax collection के लिए तीन तरह के मुख्य तरीके है –

          कुछ लोग जो tax pay करने के लिए जागरूक है वो अपने इच्छित माध्यम से bank या online भी tax pay कर सकते है |
          जो लोग सरकारी नौकरी कर रहे है या किसी प्राइवेट कम्पनी में भी काम कर रहे है उनकी सेलरी का कुछ हिस्सा भी TDS के तौर पर काट लिया जाता है और अगर बाद में कभी आप उस टीडीएस को पाना चाहते है अगर आप income tax के दायरे में नहीं आते है तो आपको Income Tax Return fill करना होता है |
          TCS के माध्यम से भी यह किया जाता है |
          Income Tax Slab Rates information – अब हम बात करते है कि कौन कौन है जो income tax के दायरे में आते है तो यह कुछ इस तरह से होता है –

          अगर आपकी आय 2,50,000 सालाना है तो आपको किसी तरह का कोई tax नहीं देना होता है |
          अगर आपकी आय 2,50,000 – 5 ,00,000 तक है तो आपको कुल income पर 10% tax देना होता है और वरिष्ट नागरिकों की श्रेणी में आने वाले लोगो के लिए यह सीमा 3,00,000 – 5 ,00,000 होता है |
          अगर आपकी आय 5,00,000 – Rs.10,00,000 की रेंज में है तो आपको अपनी कुल आय का 20 % हिस्सा tax के रूप में देना होता है |
          वन्ही Rs.10,00,000 से अधिक होने पर यह 30 % हो जाता है |
          किन किन तरह की आय पर लगता है है आयकर / income tax type information– निम्न स्त्रोतों से प्राप्त होने वाली आय पर आपको आयकर देना होता है –

          आपकी तनख्वाह से होने वाली आमदनी पर आपको tax देना होता है |
          आपकी प्रॉपर्टी से होने वाली आमदनी पर |
          Capital Gains , लाटरी , महंगे उपहार अगर आपको प्राप्त होते है इसके अलावा bank में जमा आपकी राशी से मिलने वाले ब्याज में एक नियत सीमा से अधिक ब्याज अगर आपको प्राप्त होता है तो उस पर भी आपको income tax देय होता है |

          Answered on April 4, 2017.
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