विदेश से माल इम्पोर्ट कैसे करें – How to Import Goods From Foreign Countries

विदेशों से सस्ता माल Import करने के लिए क्या क्या करना पड़ता हैं? क्या हमें Import का Business करने के लिए किसी तरह का रजिस्ट्रेशन लेना पड़ेगा? क्या हम China जैसी कन्ट्रीज से ऑनलाइन माल इम्पोर्ट कर सकते हैं

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      एक जगह पर कम दाम में बिकने वाली वस्तु किसी और जगह पर अधिक दाम में बिकती है| चीज़ों की कीमत का यह फर्क पूरी तरह से मांग और उसके मौजूदा विकल्पों पर आधारित होती है| इस बात को हम एक सामान्य उदहारण के द्वारा समझते हैं|

      इम्पोर्ट एक्सपोर्ट की प्राथमिक जानकारी – Basic Knowledge of Import Export

      भारत किसानों का देश कहा जाता है| मान लीजिये, यहाँ पर कपास अधिक मात्रा में उगाया जाता है| तो ऐसे में अगर किसान या कोई व्यापारी चाहे तो किसी ऐसे देश में कपास एक्सपोर्ट कर सकता है जहाँ पर कपास की कीमत ऊँची मिलती होगी|

      इस स्थिति में यह कहा जायेगा की वह किसान या व्यापारी कपास को एक्सपोर्ट कर रहा है| इस से उलट अगर कोई व्यक्ति परदेस से कोई वस्तु देश में मंगवाता है तो उसे इम्पोर्ट करना कहा जाता है|

      अगर कोई नागरिक Import Export का काम शुरू करना चाहता है तो उसे गवर्नमेंट से  कुछ लाइसेंस लेने पड़ते हैं| और इस बिज़नेस में सफल होने के लिए उसके पास बाज़ारों को समझने की सूझ-बुझ भी होनी चाहिए|

      इम्पोर्ट एक्सपोर्ट बिज़नेस के नियम Import Export Rules & Licence

      # 1000 रुपये फिस भर कर विदेश व्यापार महानिदेशालय नयी दिल्ली से IEC (Import Export Code) लेना होगा|

      # फ़ीस का भुगतान जोनल जॉइंट डी जी ऍफ़ टी के फेवर में डिमांड ड्राफ्ट अथवा पे आर्डर द्वारा भेजा जा सकता है|

      # IEC डुप्लीकेशन चार्ज 200 रूपया लगता है| लेकिन Import Export Code मॉडिफिकेशन मुफ्त होता है|

      # आई ई सी फॉर्म ऑनलाइन हासिल करना है तो, इस लिंक पर  जाना होता है| www.dgft.gov.in

      # IEC लेने के लिए आप के पास PAN Card होना अनिवार्य है|

      # रजिस्ट्रेशन प्राप्ती के लिए आप को कस्टम एंड टेक्सेशन विभाग से संपर्क करना होगा|

      # कुछ ख़ास तरह के केमिकल, कपडे या असामान्य चीज़ों के इम्पोर्ट एक्सपोर्ट के लिए अलग से लाइसेंस प्रक्रिया होती है जिसकी सही जानकारी डी.जी.ऍफ़.टी. विभाग से मिल जाती है|

      Import Export Related Additional Tips – अतिरिक्त जानकारी

      Bank का चुनाव

      जब बात इम्पोर्ट एक्सपोर्ट की है तो पैसों के लेन-देन और दूसरे संलग्न कार्यों को करने के लिए काम चार्जिस पर सेवाएं उपलब्ध कराने वाले बैंक का चुनाव करना अहम् होता है| कई बार ऐसा होता है की पैसे भेजने के बाद माल मिलने में देरी हो जाती है तब बैंक एक मीडियेटर के तौर पर अहम् भूमिका में होता है| जब तक एक्सपोर्टर आप का माल शिप नहीं करा देगा तब तक बैंक भुगतान नहीं देती है|

      Deal Agreement

      कोई वस्तु इम्पोर्ट या एक्सपोर्ट करेंगे तब उसका एक अग्रीमेंट बनता है| जिसमें, कब माल पैक होगा| कब भुगतान होगा| क्वालिटी क्या रहेगी| कब तक माल कस्टम से क्लियर हो कर बायर तक पहुंचेगा| यह सब लिखित में मेंशन होता है| इसे अच्छे से समझ लेना होता है|

      मैनुफैक्चरर्स और सेलर्स की जानकारी

      घर बैठे आप विदेश के व्यापारी या कंपनी की माली हालत पता नहीं कर पाते हैं| ऐसे में उनके साथ किया हुआ गलत सौदा आप को डूबा भी सकता है| इस लिए इस कार्य को सरकारी एम्बेसी की दूतावास वेबसाइट पर चेक करें| india.gov.in/overseas/embassies इस वेबसाइट के माध्यम से आप किसी देश की किसी कंपनी की वित्तीय हालत जान सकते हैं|

      बाज़ार

      जो सामान Import कर रहे हैं उसका बाज़ार क्या है| और भविष्य कैसा रहेगा| इन सभी बातों पर गौर करना ज़रूरी है| प्रतिस्पर्धी क्या कर रहे हैं| और आप जो प्रोडक्ट Import कर रहे हैं उसके विकल्प क्या बन रहे हैं, यह सब आंकलन करते रहना बेहद ज़रूरी होगा| कभी कभी किसी चीज़ के दाम अचानक बढ़ सकते हैं तो कभी कोई चीज़ अचानक सस्ती भी मिलने लगती है|

      शिपिंग

      कई बार प्रोडक्ट सस्ता होता है लेकिन उसे घर तक लाने का खर्चा बढ़ जाता है| ऐसे में Import Export पर क्या चार्ज लगेगा ये देखना ज़रूरी है| शिपिंग दो तरह के होते हैं| एक तो प्रोडक्ट को शिप तक लाने वाले और दूसरे वह जो खरीदार तक माल डिलीवर करते हैं| प्रोडक्ट मंगाते समय शिपिंग खर्च और समय सिमा की जानकारी तय करना बहुत ज़रूरी होता है|

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      Answered on January 5, 2019.
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