Mobile Phone के इस्तेमाल से क्या सच में पक्षियों को नुकसान होता है?

kya Mobile Phone ke use se sach me Birds ko Nuksaan pahuchta hai, agar haan to kaise or kaise ham iska Istemaal kam kar sakte hai or kaise anay tariko se Birds ko bachha sakte hai.

Add Comment
  • 1 Answer(s)

      क्या Mobile Network पक्षियों के लिए खतरा है –

      जब देश में मोबाइल नेटवर्क और टावर की संख्या बढ़ने लगी तो लोगों के बिच में यह बात उठी की क्या मोबाइल टावर से कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी हो सकती है और टावर का Radiation कितना खतरनाक हो सकता है और इससे इंसान के शरीर पर क्या प्रभाव पड़ते है, इस बारे में वाद-विवाद भी हुए लेकिन कभी कोई जाच नहीं हुई| फिल्म 2.0 के बाद तो यह सवाल भी उठा की क्या इस रेडियेशन से पक्षियों को भी नुकसान पहुचता है, रेडियेशन पक्षी के लिए खतरा कैसे है|

       

      पक्षी के लिए कैसे खतरा है टावर का रेडियेशन – 2.0

      हमारे आस-पास दो प्रकार के पक्षी होते है पहले जो आस-पास है और दुसरे जो बाहर से आते है जिन्हें हम प्रवासी पक्षी कहते है, जो मोसम के परिवर्तन होने पर आते है| ये पक्षी धरती के चुम्बकीय क्षेत्र की सहायता से अपना रास्ता ढूंढते है| लेकिन जब ये प्रवासी पक्षी किसी टावर के पास से निकलते है तो उसके इलेक्ट्रोमेग्नेटिक फील्ड रेडिएशन के संपर्क में आ जाते है जिससे वे रास्ता भटक जाते है और खो जाते है| टावर के रेडिएशन के संपर्क में आने से लगभग 20% पक्षीयो की मौत हो जाती है और बाकि बचे पक्षियों की मानसिक स्थिति इतनी ख़राब हो जाती है की वे वापस अपने घर तक नहीं जा सकते है| इससे यह साफ है की जैसा फिल्म 2.0 में बताया गया है की मोबाइल टावर का रेडियेशन ही पक्षियों की मौत का कारण है|

      radiation birds

      टावर के रेडिएशन के कारण पक्षी की प्रजनन क्षमता,  अंडों के छिलके की मोटाई और अंडों के आकार में भी बदलाव आ जाता है, कभी कभी अन्डो से चूजे निकलते ही मर जाते है जैसा फिल्म 2.0 में प्रदर्शित है| पक्षियों पर हुए सभी रिसर्च भारत के बाहर हुए है जिनमे ये साबित हुआ है की टावर के रेडियेशन के कारण पक्षियों की संख्या में कमी हुई है, ये रेडियेशन पक्षियों के वंश पर ही खतरा बन गया है|

      पहले आपको हमेशा अपने घर के आस-पास गोरेया देखने को मिल जाती थी लेकिन अब एक भी गोरेया नही दिखती कारण टावर का रेडियेशन| ये रेडियेशन केवल प्रवासी पक्षियों के लिए खतरा नहीं बल्कि आपके आस-पास के सभी पक्षियों और मानव जाती पर भी खतरा बन गया है, इसके कारण पक्षियों की संख्या में लगातार कमी हो रही है|

      जिस तरह विदेशो में टावर की फ्रीक्वेंसी और पक्षियों को बचने के लिए कानून है तथा समय-समय पर जो रिसर्च होती है, वैसे ही आज भारत में भी कानून बनाने की जरुरत है और उनका सख्ती से पालन करना चाहिए| पक्षियों के मौत का कारण टावर ही है, क्योकि मोबाइल और टेलिकॉम कंपिनयो के हेडक्वार्टर की फ्र्क्वेंसी को कंट्रोल कर सकते है, लेकिन टावर का रेडियेशन कितना है ये सिर्फ कम्पनी का पता है जो अपने मुनाफे के लिए रेडियेशन की लिमिट को भही भूल जाते है, सरकार को भी इसके लिए महत्वपूर्ण कदम उठाने चाहिए|

       

      अपने मोबाइल के रेडियेशन की जाच कैसे करे-

      अगर आपके पास मोबाइल है तो उसमे से भी रेडियेशन निकलता है परन्तु एक लिमिट तक, जब तक की वह मानव शरीर को नुकसान न पहुचाए| आपके मोबाइल से निकलने वाले रेडियेशन को SAR(Specific Absolute Rate) कहते है| अपने मोबाइल में SAR की जाच करने के लिए *#07# डायल करे, अगर SAR 1.6 W/Kg तक या इससे कम है तो रेडियेशन कम है और कंट्रोल में है, लेकिन 1.6 W/Kg अधिक है तो आपके लिए खतरनाक है, ऐसे रेडियेशन से आपको हर्दय रोग, चर्म रोग और कैंसर जैसी घातक बिमारिय होने की पूर्ण सम्भावना है|

       

      Related Links –

      Answered on December 26, 2018.
      Add Comment

      Your Answer

      By posting your answer, you agree to the privacy policy and terms of service.