Motivational Hindi Poems – प्रेरणादायक हिंदी कविताएँ

    सबसे प्रेरणादायक हिंदी कविताएँ कौनसी है ??

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          एक बूँद – अयोध्या सिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’

      RE: Motivational Hindi Poems - प्रेरणादायक हिंदी कविताएँ

       

      ज्यों निकल कर बादलों की गोद से।

      थी अभी एक बूँद कुछ आगे बढ़ी।।

       

      सोचने फिर फिर यही जी में लगी।

      आह क्यों घर छोड़कर मैं यों बढ़ी।।

       

      दैव मेरे भाग्य में क्या है बढ़ा

      में बचूँगी या मिलूँगी धूल में।।

       

      या जलूँगी गिर अंगारे पर किसी।

      चू पडूँगी या कमल के फूल में।।

       

      बह गयी उस काल एक ऐसी हवा।

      वह समुन्दर ओर आई अनमनी।।

       

      एक सुन्दर सीप का मुँह था खुला।

      वह उसी में जा पड़ी मोती बनी।।

       

      लोग यों ही है झिझकते, सोचते।

      जबकि उनको छोड़ना पड़ता है घर।।

       

      किन्तु घर का छोड़ना अक्सर उन्हें।

      बूँद लौं कुछ और ही देता है कर।।

      –अयोध्या सिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’

      RE: Motivational Hindi Poems - प्रेरणादायक हिंदी कविताएँPIB Press Releases

      Answered on March 6, 2017.
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        खग उड़ते रहना जीवन भर

        Abhishek Singh-Poetry


        भूल गया है तू अपना पथ
        और नही पँखो मे भी गति
        किंतु लौटना पीछे पथ पर
        अरे मौत से भी है बदतर

        मत डर प्रलय झकोरो से तू
        बढ़ आशा हलकोरो से तू
        छण मे अरि दल मिट जाएगा
        तेरे पँखो से पीसकर

        यदि तू लौट पड़ेगा थक कर
        अंधर, काल, बवंडर से डर
        प्यार तुझे करने वाले ही
        देखेंगे तुझको हंस हंस कर

        और यदि मिट गया चलते चलते
        मंज़िल पथ तय करते करते
        खाक चढ़ाएगा जाग
        उन्नत भाल और आँखो पर

        Abhishek Singh-Poetry

        खग उड़ते रहना जीवन भर

        गोपालदास नीरज

        Answered on October 10, 2015.
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          “हिमालय” – सोहनलाल द्विवेदी

          Himalaya

          Khada Himalaya Bata Raha Hai – Sohanlal Dwivedi

          युग युग से है अपने पथ पर
          देखो कैसा खड़ा हिमालय!
          डिगता कभी न अपने प्रण से
          रहता प्रण पर अड़ा हिमालय!

          जो जो भी बाधायें आईं
          उन सब से ही लड़ा हिमालय,
          इसीलिए तो दुनिया भर में
          हुआ सभी से बड़ा हिमालय!

          अगर न करता काम कभी कुछ
          रहता हरदम पड़ा हिमालय,
          तो भारत के शीश चमकता
          नहीं मुकुट–सा जड़ा हिमालय!

          खड़ा हिमालय बता रहा है
          डरो न आँधी पानी में,
          खड़े रहो अपने पथ पर
          सब कठिनाई तूफानी में!

          डिगो न अपने प्रण से तो
          सब कुछ पा सकते हो प्यारे!
          तुम भी ऊँचे हो सकते हो
          छू सकते नभ के तारे!!

          अचल रहा जो अपने पथ पर
          लाख मुसीबत आने में,
          मिली सफलता जग में उसको
          जीने में मर जाने में!

           

           

           

          Answered on October 9, 2015.
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            कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती – हरिवंश राय बच्चन


            Never Give Up

            Koshish karne walon ki haar nahi hoti Harivansh Rai Bachchan

            लहरों से डरकर नौका पार नहीं होती
            कोशिश करने वालों की हार नहीं होती

            नन्ही चीटी जब दाना लेकर चलती है
            चढ़ती दीवारों पर, सौ बार फिसलती है
            मन का विश्वास रगों मे साहस भरता है
            चढ़कर गिरना, गिरकर चढ़ना न अखरता है
            आखिर उसकी मेहनत बेकार नहीं होती,
            कोशिश करने वालों की हार नहीं होती

            डुबकियां सिन्धु मे गोताखोर लगाता है,
            जा जा कर खाली हाथ लौटकर आता है
            मिलते नहीं सहज ही मोंती गहरे पानी में,
            बढ़ता दुगना उत्साह इसी हैरानी में.
            मुट्ठी उसकी खाली हर बार नहीं होती,
            कोशिश करने वालों की हार नहीं होती

            असफलता एक चुनौती है, इसे स्वीकार करो,
            क्या कमी रह गई, देखो और सुधार करो .

            जब तक ना सफल हो, नींद चैन को त्यागो तुम,
            संघर्ष का मैदान छोड़कर मत भागो तुम.
            कुछ किए बिना ही जय जयकार नहीं होती,
            कोशिश करने वालों की हार नहीं होती

            Answered on October 9, 2015.
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              नर हो न निराश करो मन को – मैथिलीशरण गुप्त

              Motivational Poem


              Nar Ho Na Nirash Karo Man Ko – Maithili Sharan Gupt

              नर हो न निराश करो मन को
              कुछ काम करो कुछ काम करो
              जग में रहके निज नाम करो
              यह जन्म हुआ किस अर्थ अहो
              समझो जिसमें यह व्यर्थ न हो
              कुछ तो उपयुक्त करो तन को
              नर हो न निराश करो मन को ।

              संभलो कि सुयोग न जाए चला
              कब व्यर्थ हुआ सदुपाय भला
              समझो जग को न निरा सपना
              पथ आप प्रशस्त करो अपना
              अखिलेश्वर है अवलम्बन को
              नर हो न निराश करो मन को ।

              जब प्राप्त तुम्हें सब तत्त्व यहाँ
              फिर जा सकता वह सत्त्व कहाँ
              तुम स्वत्त्व सुधा रस पान करो
              उठके अमरत्व विधान करो
              दवरूप रहो भव कानन को
              नर हो न निराश करो मन को ।

              निज गौरव का नित ज्ञान रहे
              हम भी कुछ हैं यह ध्यान रहे
              सब जाय अभी पर मान रहे
              मरणोत्तर गुंजित गान रहे
              कुछ हो न तजो निज साधन को
              नर हो न निराश करो मन को ।

               

               

               

               

               

               

               

              Answered on October 9, 2015.
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                तूफानों की ओर घुमा दो नाविक निज पतवार – शिवमंगल सिंह सुमन

                Tufanon ki aur poem

                Tufanon ki aur – Shiv Mangal Singh Suman

                आज सिन्धु ने विष उगला है
                लहरों का यौवन मचला है
                आज ह्रदय में और सिन्धु में
                साथ उठा है ज्वार

                तूफानों की ओर घुमा दो नाविक निज पतवार

                लहरों के स्वर में कुछ बोलो
                इस अंधड में साहस तोलो
                कभी-कभी मिलता जीवन में
                तूफानों का प्यार

                तूफानों की ओर घुमा दो नाविक निज पतवार

                यह असीम, निज सीमा जाने
                सागर भी तो यह पहचाने
                मिट्टी के पुतले मानव ने
                कभी ना मानी हार

                तूफानों की ओर घुमा दो नाविक निज पतवार

                सागर की अपनी क्षमता है
                पर माँझी भी कब थकता है
                जब तक साँसों में स्पन्दन है
                उसका हाथ नहीं रुकता है
                इसके ही बल पर कर डाले
                सातों सागर पार

                तूफानों की ओर घुमा दो नाविक निज पतवार ।।

                Answered on October 9, 2015.
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