Underwriting क्या होता हैं. इसमें किस तरह से कार्य होता हैं? How Does Underwriting Work?

Banking, इन्वेस्टमेंट और बीमा क्षेत्रों में कई कंपनियां Underwriting Firms की सेवाएँ लेती हैं और बदले में उन्हें Underwriting Commission देती हैं. Underwriting क्या हैं और इस प्रक्रिया में किस प्रकार से कार्य होता हैं? Underwriting Firms का मुख्य कार्य क्या होता हैं?

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    Underwriting Meaning (Hindi)

    Underwriting एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसका Share Market और Financial Market में एक महत्वपूर्ण योगदान रहा है| जब Company के सारे Shares नहीं बिकने तो कुछ वित्तीय संस्थाए या अन्य कम्पनिया उन Shares को खरीदने की गारंटी देती है, जिससे उन शेयर कम्पनियों को उनके Shares ना बिकने से loss नहीं होता और उनका Risk भी कम हो जाता है| इसके बदले में उन शेयर कम्पनियों को उन्हें Fees या Commission देना पड़ता है, इस प्रक्रिया को ही Underwriting कहते है|

    सरल शब्दों में कहाँ जाए तो जब Companies सबसे पहले अपने Shares खुले बाजार में जनता के सामने लाती है, तो उसे Initial Public Offering (IPO) कहते है| इस IPO में कम्पनी को अपने Shares की बिक्री पर संदेह होता है, की Shares बिकेंगे या नहीं, तो इस परिस्थिति में वह Company कुछ ऐसी वित्तीय संस्थाओ (Financial Organizational) या अन्य Underwriting कम्पनियों से अनुबंध कर लेती है| जिसमे यह वित्तीय संस्थाए इन शेयर कम्पनी को यह गारंटी देती है, की अगर किसी भी वजह से आपके पुरे Shares नहीं बिकते तो उसे हमारे द्वारा खरीद लिया जाएगा, ताकि उस शेयर कम्पनी का Risk भी कम हो जाए और उन्हें हानि भी ना हो| इसके बदले में वे शेयर कम्पनीया उन्हें फीस या Commission का भुगतान करती है|

    How Underwriting works – कैसे काम करती है|

    Underwriting मुख्य रुप से शेयर जारी करने वाली कंपनी और निवेशकों के बीच Intermediary की भूमिका निभाती है| यह शेयर जारी करने वाली Company के नजरिये में गारंटी या Insurance की तरह होता है, क्योकि जब नए Shares बाजार में निर्गमित (Issue) होते है तो जनता को उस पर ज्यादा भरोशा नहीं होता और उसकी Price भी ज्यादा होती है| इसी कारण से वह Shares बाजार में ज्यादा खरीदे नहीं जाते है, इसलिए यह वित्तीय संस्थाए शेयर्स के न बिकने पर उन Shares को खरीदने का आश्वासन और Guarantee देती है| जिससे यह Share Companies निर्गमन (Issue) के समय Fund जुटाने के लक्ष्य को आसानी से पूरा कर लेती है|

    किसी भी Share की Price को सही तरह से Response न मिलने की स्थति में Underwriting एक बहुत ही Important Role Play करती है| हालाँकि अगर किसी शेयर कंपनी ने किसी वित्तीय संस्था से Underwriting की है, लेकिन आगे जाकर पत्ता चलता है की इसकी जरुरत नहीं थी| क्योकि कम्पनी के सारे Shares बिना किसी Risk के बिक चुके है, तो उस स्थति में भी शेयर कम्पनी को उस वित्तीय संस्था को Payment तो करना ही पड़ेगा| लेकिन अगर कम्पनिया Underwriting करती है, तो उनका Risk काफी हद तक कम हो जाता है, जो उनके Shares की बिक्री से जुड़ा होता है|

    Insurance कम्पनियों में भी इसी प्रकार Underwriting काम करती है| बीमा कम्पनिया एक Target Set करती है की इतने समय में हमारे इतनी Insurance Policies बिकनी चाहिए, तो वो भी इन वित्तीय संस्थाओ से Underwriting करती है| जिसमे यह Financial Organization उस एक निश्चित समय में न बिकने वाली उन Insurance Policies को Sales करवाने का या खुद खरीदने का वचन यानी गारंटी देती है|

    इसी प्रकार जब कोई व्यक्ति बीमा करवाने के लिए Apply करता है, तो वह उस बीमा कंपनी को अनिवार्य रूप से भविष्य में किसी दावे का भुगतान करने के संभावित खतरे को लेने के लिए कह रहा है| इस कारण अपने Target को पूरा करने और Risk को कम करने के लिए बीमा कम्पनिया Underwriting करती है|

    Answered on September 13, 2017.
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